सीसीटीवी लगाने का आदेश कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए नहीं था: सुप्रीम कोर्ट

February 14, 2018 3:18 pm0 commentsViews: 1

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बताया कि देशभर की अदालतों और ट्रिब्यूनल में अदालत कक्षों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने के आदेश का कार्यवाही की रिकार्डिंग करने के लिए नहीं दिया गया था। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने कहा कि अदालत कक्षों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश सुरक्षा और न्यायिक प्रशासन को ध्यान में रखते हुए दिया था ना कि अदालती कार्यवाही रिकॉर्ड करने के लिए।

पीठ ने कहा कि अदालत की कार्यवाही अदालत कक्ष में मौजूद लोगों के लिए खुली होती है परन्तु यह उन लोगों के लिए खुली नहीं हो सकती, जो कोर्ट रूम में मौजूद नहीं होते हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 मार्च की तिथि तय हुई है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान 26/11 के मुंबई हमले और वर्ष 2016 में पटियाला हाउस कोर्ट में हुई घटना का जिक्र करते हुए टिप्पणी करी कि कोर्ट और ट्रिब्यूनल में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश देने का मकसद शिष्टाचार, सुरक्षा और न्यायिक कार्यवाही पर निगरानी रखना था। विक्टोरिया टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे इसी कारण ट्रायल कोर्ट में अजमल कसाब पर शिकंजा कसा जा सका।

पीठ ने कहा कि वर्ष 2002 में नागपुर जिला अदालत परिसर में पिंटो शिर्के की सरेआम हत्या की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि सैकड़ों लोगों के सामने घटना होने के बाद भी कोई भी व्यक्ति गवाही देने सामने नहीं आया और वहां सीसीटीवी साक्ष्य उपलब्ध नहीं था। सीसीटीवी कैमरे ऐसी घटनाओं में मददगार साबित हो सकते हैं। पीठ ने yah भी कहा कि अगर निजता का मामला हो तो सीसीटीवी कैमरों को बंद किया जा सकता है।

पीठ ने केंद्र सरकार से नई तकनीक को अपनाने की सलाह देते कहा कि वह स्टेट ट्रिब्यूनल आदि में भी सीसीटीवी कैमरे लगाने पर विचार करें।

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