क्या आपने भरा है ‘दिल का बिल’? 😜

February 26, 2018 11:37 am0 commentsViews: 72

इश्क के फंडे का फायदा सबसे ज़्यादा मोबाईल फोन कंपनियों ने उठाया है। इधर इश्क के परवाने मोबाईल के ज़रिए रात दिन प्यार की पींगे बढ़ाते हैं और उधर इनका मीटर दौड़ता रहता है। आखिर दिल में बिल की परवाह कौन करता है?

रोज़ ही प्रेम के परवानों को फांसने के लिए नए-नए फोन और लुभावने प्लान बाज़ार में आते रहते हैं… बेचारे प्रेमी! बज़ार में प्लान भी प्रेमिका के नेचर के हिसाब से ही आते हैं। जैसे कि नींद कम आती है तो रात्रि में फ्री टॉकटाइम प्लान, पढ़ने का शौक है तो फ्री एसएमएस प्लान। नया फोन बाज़ार में आते ही धड़कन और भी तेज़ी से ब़ढ़ जाती हैं, फ़ोन के फीचर्स की जगह निगाह कीमत पर होती है. पता नहीं कब डिमांड आ जाए!

प्रेमिका से अगर शिकायत कर दी कि “फोन क्यों नहीं किया?” बस प्रेमिका शुरू “फोन में बेलेंस होता तो करती ना।” इतना सुनने पर भी अगर प्रेमी बेलेंस ना डलवाए तो फिर प्रेमी ही कैसा? दौड़ पड़ते हैं रिचार्ज कूपन खरीदने। यह तो बाद में पता चलता है कि सारा जेबखर्च रिचार्ज कराने में लगा दिया.

उधर फोन पर बातचीत करने का सिलसिला शुरू होता है, इधर प्रेमी की धढ़कन बिल पर टिक जाती है। इधर प्रेमिका चाहती है कि खूब देर तक बातें होती रहें, उधर प्रेमी फोन काटने का बहाना ढ़ूंढ़ते रहते हैं। वैसे बहाना चलता नहीं है! कुछ कह दिया तो समझो कयामत आ गई, “फोन तो मैंने किया है और बिल की परवाह तुम कर रहे हो?” खिसियाते हुए बोलता है “यार! बिल तुम्हारा हो या मेरा बात तो एक ही है” इस पर प्रेमिका खुश! वैसे भी छुरी खरबू़ज़े पर गिरे या खरबूज़ा छुरी पर, कटता तो खरबूज़ा ही है। बेचारा मन ही मन खीजने के सिवा और कर भी क्या सकता है। एक अदद प्रेमिका रखना इतना आसान थोड़े ही है।

दिल का बिल तो नहीं आता है लेकिन बिल के लिए दिल तो चाहिए।