अपराधी राजनैतिक पार्टी कैसे चला सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

February 13, 2018 11:12 am0 commentsViews: 16

सुप्रीम कोर्ट ने अपराधी और भ्रष्ट व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल का प्रमुख बनाने के ऊपर सवाल उठाया. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह का चलन चुनाव प्रक्रिया की निर्मलता पर चोट है। कोर्ट ने कहा कि यह चिंता का विषय है कि जब अगर दोषी करार दिया व्यक्ति खुद चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य है, ऐसे में वह किसी राजनीतिक दल का प्रमुख है. जो व्यक्ति खुद चुनाव नहीं लड़ सकता वह कैसे चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन कर सकता है? ऐसी स्थिति में यह पूरी तरह संभव है कि उसके द्वारा चुने हुए उम्मीदवारों में से कुछ जीतकर सरकार में भी शामिल हो जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर बेहद सख्त कमेंट करते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि अगर कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि कानून के तहत चुनाव नही लड़ सकता तो फिर वो राजनीतिक पार्टी कैसे बना सकता है?
पीठ ने कहा कि लोकतंत्र के लिए इससे बुरा क्या हो सकता है अगर किसी राजनीतिक दल का प्रमुख अपराधी हो। और दल का प्रमुख होने के नाते वह यह तय करें कि उसकी पार्टी से कौन-कौन चुनाव लड़े। तीन सदस्यीय पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे हैं.

पीठ ने कहा कि यह तो लोकतंत्र के मूल सिद्धांत के ही विपरीत है कि किसे वोट देना चाहिए, यह एक अपराधी तय करे। यह उस फैसले के खिलाफ है जिसमें चुनाव की निर्मलता के लिए राजनीती को भ्रष्टाचार से मुक्त रखने की बात कही गई है। पीठ ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि जो काम आप खुद न कर सके उस काम को अपने कुछ एजेंट के द्वारा अंजाम दें। पीठ ने कहा कि लोग कुछ लोगों का समूह बनाकर अस्पताल या स्कूल आदि तो खोल सकते हैं लेकिन यह बात शासन प्रणाली पर यह लागू नहीं होती। दागी नेताओं के राजनीतिक पार्टी प्रमुख बनने के खिलाफ वकील अश्विनी उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर की थी। इसी याचिका पर सुनावई करते हुए कोर्ट ने यह टॉक टिप्पणी की। इस पीआईएल पर चुनाव आयोग की तरफ से काउंसलर अमित शर्मा ने भी समर्थन दिया।

इस केस में केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद पेश हुई थी और उनके पीठ से इस आग्रह के बाद कि सरकार को इस संबंध में अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय चाहिए, पीठ ने सुनवाई दो हफ्ते के लिए टाल दी।