यूपीए में शुरू होकर एनडीए सरकार में 50 गुना तक बढ़ गया पीएनबी घोटाला

February 16, 2018 5:57 pm0 commentsViews: 24

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में हुए देश के सबसे बड़े बैंक घोटाले पर एक के बाद एक कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस बीच इलाहाबाद बैंक के पूर्व डायरेक्टर ने दावा किया है कि यह घोटाला यूपीए सरकार के दौर में शुरू हुआ था और एनडीए सरकार में 50 गुना तक बढ़ गया। इस घोटाले में लिप्त गीतांजलि ग्रुप को गलत तरीके से फायदा पहुंचाने के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वाले बैंक के पूर्व डायरेक्टर दिनेश दूबे ने बताया कि उन्होंने गीतांजलि जेम्स के खिलाफ 2013 में सरकार और RBI को डिसेन्ट नोट भेजा था, परन्तु उन्हें इस लोन को अप्रूव करने का आदेश दिया गया। जब उनपर दबाव डाला गया तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

दिनेश दूबे ने कहा कि शिकायत करने पर उन्हें वित्त सचिव की तरफ से ऊपरी दबाव की बात कहकर स्वतंत्र निदेशक पद से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था। दिनेश दूबे ने मीडिया को बताया कि वह जांच एजेंसियों को सहयोग देने को तैयार हैं। उन्होंने बताया कि वह पत्रकार हैं और 2012 में उन्हें बैंक का स्वतंत्र निदेशक बनाया गया था।

घोटाला सामने आने के बाद बुधवार को 10 कर्मचारियों को निलंबित किया गया था। आज घोटाले में शामिल होने के संदेह में 8 और अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया, जिसमें महाप्रबंधक स्तर तक का एक अधिकारी भी शामिल है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि पीएनबी अन्य बैंकों को इस मामले में उनके बकाए का भुगतान 31 मार्च तक कर देगा।

ज्ञात रहे कि यह घोटाला हीरे के आभूषण डिजाइनर नीरव मोदी द्वारा पीएनबी की मुंबई शाखा से फर्जी साख पत्र हासिल करने और अन्य भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से कर्ज हासिल करने से संबधित है। पीएनबी घोटाला 11,300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है और इसमें नीरव मोदी और उनके मामा मेहुल चौकसी का नाम सामने आया हैं। मामले की जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय सहित अन्य एजेंसियों द्वारा जांच की जा रही है। जांच का विषय यह भी है कि साख पत्र या एलओयू के आधार पर कितना कर्ज दिया गया। पीएनबी जांच रिपोर्ट के आधार पर देनदारियों का भुगतान करेगा। यहाँ यह भी जानना आवश्यक है कि जनवरी में सरकार ने पीएनबी में चालू वित्त वर्ष में 5,473 करोड़ रुपये डालने की घोषणा की थी।