BJP मेयर प्रीति अग्रवाल पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, जाँच शुरू

February 9, 2018 11:01 am0 commentsViews: 21

उत्तरी दिल्ली नगर निगम (नॉर्थ एमसीडी) की मेयर प्रीति अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार पर उपराज्यपाल ने एमसीडी के चीफ विजिलेंस अफसर (CVO) को जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रीति अग्रवाल पर भ्रष्टाचार के 12 मामलों में शामिल होने का आरोप सुप्रीम कोर्ट के वकील कैलाश चंद्र मुद्गिल ने लगाया है। मुद्गिल ने उपराज्यपाल से इस बाबत दिसंबर में शिकायत की थी, जिसमे कहा गया था कि मेयर हर काम के लिए पैसे की मांग करती हैं और बिना पैसे लिए कोई काम नहीं करती हैं।

कैलाश चंद्र मुद्निल के आरोप

  • उत्तरी दिल्ली नगर निगम एरिया में डिवेलपमेंट के लिए जितने भी टेंडर जारी किए हैं, उन्हें क्लियर करने के एवज में मेयर ने 10 प्रतिशत कमीशन लिया।
  • जिन एजेंसियों ने उन्हें पैसे नहीं दिए, उनकी फाइल अभी तक पेंडिंग हैं।
  • रोहिणी की शिवा मार्केट में एक प्लॉट की नीलामी के लिए मेयर ने 10 प्रतिशत कमिशन लिया था।
  • 6 जोन में एलईडी लाइट्स लगाने के लिए जो 130 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट एमसीडी ने एक एजेंसी को दिया है, उसमें भी मेयर ने एजेंसी से भी फाइल को क्लियर करने के लिए पैसे की मांग की थी। परन्तु एजेंसी द्वारा पैसे नहीं दिए जाने की कारण एलईडी लाइट्स लगाने की फाइल रुकी हुई है।
  • नॉर्थ एमसीडी के कर्मचारियों का उनकी मर्ज़ी के मुताबिक़ वॉर्ड, जोन या इलाके में पोस्टिंग और ट्रांसफर भी होता है और इसके लिए भी वह पैसों की मांग करती हैं।
  • सिविक सेंटर के सिक्यॉरिटी टेंडर के लिए उन्होंने पिछले साल डेप्युटी कमिश्नर (हेड क्वॉर्टर) के महेश से भी लड़ाई की थी।
  • बिल्डिंग डिपार्टमेंट के अफसरों को उनके वॉर्ड में काम करने तक की अनुमति नहीं है, प्रीति अग्रवाल पर वॉर्ड के सभी बिल्डर से सांठगांठ का आरोप लगाया है।

विजिलेंस जाँच शुरू

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रीति अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है। राष्ट्रपति भवन ने भी इस मामले में स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जबकि मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) मंगेश कश्यप ने इस बात की पुष्टि करते हुए जांच शुरू होने की पुष्टि की है।

आम आदमी पार्टी हुई हमलावर, तुरंत बर्खास्तगी की मांग

मेयर प्रीति अग्रवाल पर आम आदमी पार्टी ने भी कुछ दिन पहले टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिलीप पांडे ने कहा कि ‘आम आदमी पार्टी ने कुछ दिन पहले प्रेस कॉंफ्रेंस में बताया था कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम की मेयर प्रीति अग्रवाल ने निगम के एक टेंडर प्रोसेस को प्रभावित करने की कोशिश की है। भारतीय जनता पार्टी और उनके दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा था कि इस बार निगम में नए चेहरे- नई उड़ान की बात कही थी लेकिन वो उड़ान भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान बनाएगी ये तो आम आदमी पार्टी पहले दिन से कह रही थी और अब ये उजागर भी होने लगा है।’

दिलीप पांडे ने आगे कहा कि आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वही मेयर साहिबा हैं जिनके पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के पैसे नहीं हैं बावजूद इसके वो 5 सितारा होटल में पार्टी करती हैं। ये वही मेयर साहिबा हैं जब बवाना आग के दौरान इन्होंने अपनी ग़लती को कैमरे पर स्वीकार कर लिया था, हालांकि वो यह स्वीकार्यता चुपके से कर रही थीं लेकिन ऐसा करते हुए वो कैमरे में क़ैद हो गईं थी। इसके अलावा दिलीप पांडे ने मेयर प्रीति अग्रवाल पर 10% कमीशन मिले बिना टेंडर प्रक्रिया को तथा सम्बंधित फाइलों को अपने पास रोककर रखने, अफसरों को लज्जित करने तथा दवाओं में कमीशन लेने जैसे कई गंभीर आरोप लगाए, उन्होंने कहा कि पूसा रोड़-करोल बाग में एक व्यवसायिक इमारत के निर्माण में मेयर प्रीति अग्रवाल सक्रिय तौर पर जुड़ी हैं, इसका मतलब क्या हो सकता है वो एक साधारण इंसान आसानी से समझ सकता है।

आप ने जाँच पर उठाए सवाल

दिलीप पांडे ने जाँच पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ‘अब यह कैसे संभव है कि निगम के अंदर आने वाला विजिलेंस ही उनके खिलाफ जांच करे। जो विजिलेंस कमिश्नर सीधा मेयर साहिबा के आधीन काम करता है, वो अफ़सर कैसे इनके ख़िलाफ़ एक स्वतंत्र जांच कर सकता है? आम आदमी पार्टी की मांग है कि इस मुद्दे पर एक स्वतंत्र जांच कराई जाए और मेयर साहिबा को उनके पद से तुरंत हटाया जाए।

मनोज तिवारी से भी मांगा इस्तीफा

उन्होंने मनोज तिवारी के भी इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि अपनी असफलता और एमसीडी में किए जा रहे भ्रष्टाचार के लिए मनोज तिवारी को दिल्ली की जनता से माफी माफ़ी मांगनी चाहिए।

मेयर ने कहा आरोप बेबुनियाद

वहीँ मेयर प्रीति अग्रवाल ने अपने खिलाफ लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए उनके खिलाफ पैसे मांगने का आरोप लगाया जा रहा है जबकि ट्रांसफर-पोस्टिंग उनका अधिकार क्षेत्र ही नहीं है। यह कार्य नगर निगम के कमिश्नर और अधिकारियों का है। प्रीति अग्रवाल ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया में हस्तक्षेप के आरोपों की कोई बुनियाद नहीं हैं. किसी भी टेंडर प्रक्रिया में कोई पॉलिटिकल विंग शामिल नहीं होती है. अगर जरूरत पड़ती भी है तो मामले को सीधे स्थायी समिति को भेजा जाता है. उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर रहे सतर्कता विभाग को किसी भी तरह की खामी नहीं मिलेगी. मामले की जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा