एसपी और बीएसपी की 23 साल पुरानी दुश्मनी ख़त्म, गठबंधन की शुरुआत

March 5, 2018 10:06 am0 commentsViews: 405

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और समाजवादी पार्टी (एसपी) ने 23 साल पुरानी दुश्मनी भुलाते हुए साथ आने का फैसला किया है. हालाँकि बीएसपी प्रमुख मायावती ने एसपी के साथ 2019 लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन की खबरों से इंकार करते हुए कहा कि अभी केवल दो सीटों पर उपचुनाव और राज्यसभा चुनाव के लिए समझौता हुआ है। उन्होंने कहा कि बीएसपी पहले ही की तरह उपचुनाव में नहीं उतर रही है और उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को बीजेपी के खिलाफ सबसे मजबूत उम्मीदवार को वोट देने के लिए कहा गया है।

मायावती के अनुसार समाजवादी पार्टी राज्यसभा चुनाव में बीएसपी का समर्थन करेगी और बीएसपी विधान परिषद में एसपी का समर्थन करेगी। इसके बाद यह कयास भी तेज हो गए हैं कि मायावती खुद राज्यसभा का चुनाव लड़ सकती हैं। इससे एसपी को विधान परिषद में एक सीट का फायदा हो जाएगा। इसके साथ-साथ राज्यसभा सीट पर विपक्ष की लड़ाई मजबूत हो जाएगी।

ज्ञात रहे कि पिछले साल जुलाई में मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उनका कार्यकाल इस साल 2 अप्रैल को खत्म हो जाता। मायावती की सीट सहित उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर 23 मार्च को चुनाव होने हैं। आंकड़ों का खेल यह है कि इसमें एसपी को छोड़कर कोई भी विपक्षी दल एक भी उम्मीदवार राज्यसभा भेजने की हैसियत में नहीं है। अब जब एसपी और बीएसपी में गठबंधन पर सहमति बन गई है तो संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर मायावती के लिए फिर से राजयसभा जाने का रास्ता खुल सकता है।

उत्तर प्रदेश बीएसपी के 19 विधायक हैं, ऐसे में अगर पार्टी एसपी के साथ नहीं जाती है तो ना तो वह राज्यसभा में कोई सीट जीत सकती है और ना ही विधान परिषद चुनाव में। इसमें मायावती के लिए एक यह भी खतरा था कि बीएसपी विधायक ऐसी स्थिति में किसी और पार्टी का समर्थन कर सकते थे। इस बीच राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा भी बनी हुई है कि मायावती अपनी जगह अपने भाई आनंद कुमार को भी राज्यसभा भेज सकती हैं।

ज्ञात रहे कि उत्तर प्रदेश से राज्यसभा दस सीटों पर चुनाव होना है, जिसमें हर एक सीट जीतने के लिए कम से कम 37 वोटों की जरूरत होगी। इसमें बीजेपी के 8 उम्मीदवार आसानी से जीत सकते हैं. दूसरी तरफ एसपी के 47 विधायक और बीएसपी के 19 विधायको को जोड़नेपर संख्या 66 हो जाती है। इसमें अगर कांग्रेस के 7 विधायकों को भी जोड़ लिया जाए तो विपक्ष के पास कुल 73 वोट हो जाते हैं। इस गणित के हिसाब से विपक्ष के लिए एक सीट जीतना तय हो जाता है और दूसरी सीट के लिए भी चांस बन जाती है।

इसके साथ-साथ अगले महीने विधान परिषद चुनाव होने वाले, ऐसे में बीएसपी के साथ आने से एसपी के लिए यहाँ एक सीट और बचानी आसान हो जाएगी। एमएलसी की एक सीट के लिए 32 वोट की जरूरत होगी। यहाँ बीजेपी के खाते में 10 सीटें आना तय हैं, बाकी दो सीटों पर बीएसपी के साथ मिलकर एसपी आसानी के साथ जीत सकती है। 5 मई को जिन 12 विधान परिषद सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उसमें एसपी की 7, बीएसपी और बीजेपी की 2-2 और आरएलडी की एक सीट है।

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