साथ में खाना खाया, सोने के बाद माता-पिता और बहन को चाकुओं से गोद डाला

नई दिल्ली, वसंत कुंज के किशनगढ़ गांव में बुधवार को हुए एक ही परिवार के तीन लोगो की जघन्य हत्या की वारदात को दुर्घटना स्थल से घायल अवस्था में मिले और परिवार में एकमात्र बचे 19 साल के सूरज ने अंजाम दिया था।

सूरज ने बुधवार को करीब रात के तीन बजे अपने पिता मिथलेश वर्मा (44) के सीने और पेट पर चाकू से आठ बार वार किए। पिता की हत्या के बाद वह दूसरे रूम में सो रही अपनी मां सिया (38) के पास पहुंचा और उसे सात बार चाकुओं से गोद डाला। दो हत्याएं करने के बाद उसने अपनी नाबालिग बहन के कमरे का रुख किया। उसने बहन पर चाकू से चार वार किए।

अपने परिवार के लोगों की हत्या के बाद सूरज उनकी लाश के पास ही 2 घंटे तक बैठा रहा, ताकि पुलिस को एक कहानी बताई जा सके। उसने सुबह करीब 5:30 बजे अपने एक पड़ोसी को इसी सूचना दी। उसने पड़ोसी को बताया कि दो चोरों ने उसके घर में घुसकर परिवार के लोगों की हत्या कर दी।

माता-पिता और बहन की हत्या में परिवार में जिंदा बचे सूरज को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने इस वजह से सबकी हत्या की क्योंकि वह पिता की डांट से नाराज रहता था। सबकी हत्या से पहले सबकुछ सामान्य था, सबने मिलकर खाना खाया था, लेकिन रात को सूरज ने तीनों की हत्या कर दी।

सोचिये एक किशोर माँ-बाप की डांट से इस कदर आहत हो गया कि उसने पुरे परिवार की हत्या जैसा जघन्य कदम उठा लिया। इकबालिया बयान में उसने पुलिस के सामने यह क़ुबूल किया है कि वह पढ़ाई के लिए बार-बार डांट खाने की वजह से परेशान था।

इस घटना के पीछे से जो बातें निकल के आ रही हैं उसके अनुसार पिता मिथिलेश अपने इकलौते बेटे के गलत लाइन पर चलने का विरोध करते थे और कई बार न मानने पर उसकी पिटाई भी कर देते थे। बस इसी वजह से बेटे के अंदर घर बना चुकी कुंठा ने इतना वीभत्स रूप ले लिया कि उसने अपने परिवार को मौत के घाट उतार दिया। हालांकि पहले उसने सिर्फ पिता की हत्या करने की योजना बनाई थी, पर बाद में उसने अपनी आजादी में रोड़ा बनने वाली मां और अपनी बहन को भी मार डाला।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी सूरज और आठ-दस अन्य लड़के-लड़कियों ने मिलकर महरौली में एक फ्लैट किराए पर ले रखा था। सभी 500 से 700 रुपये मिलाकर मकान मालिक को किराया देते थे और अपनी तरह से तथाकथित आजादी या फिर अय्याशी की जिंदगी जीते थे।

पुलिस का कहना है कि मंगलवार को ही सूरज ने महरौली से चाकू और कैंची खरीदी थी। उस दुकान का भी पता लग गया है। पुलिस के अनुसार अपने माता-पिता और बहन की हत्या उसने अकेले ही की। वह चाकू और कैंची को बैग में रखकर घर पर लाया था। घर पर सब कुछ सामान्य, था सभी ने साथ-साथ खाना खाया। इसके बाद जब सभी सो गए तो सूरज ने देर रात करीब 3 बजे सबसे पहले सोते हुए अपने पिता को मारा। उसके बाद मां पर वार किया। इसी दौरान बहन नेहा जग गई, उसने शोर मचाना चाहा तो उसे चाकू से गोद डाला। यहां मां बेटी को बचाने आईं तो मां पर भी चाकू के ताबड़तोड़ वार कर दिए। उसकी हैवानियत यहीं नहीं रुकी बल्कि इसके बाद तीनों पर कैंची से भी वार किए।

मानसिक अवसाद इतना ज़्यादा था कि जिन्होंने पालपोस कर बड़ा किया उसने उन्हें ही सोते हुए बेरहमी के साथ क़त्ल कर दिया, बहन नेहा का तो गला भी काट दिया गया जबकि पिता के पेट, गले और दिल पर चाकू और कैंची से ताबड़तोड़ वार किए गए।

इसके बाद सूरज ने कहानी बनाई कि दो हत्यारों ने क़त्ल की इस वारदात को अंजाम दिया और उसके बाद वह बालकनी से भाग गए। हालाँकि घर से कोई भी कीमती सामन गायब नहीं था और बालकनी में कहीं भी खून के निशान नहीं थे। जबकि तीनों को बेरहमी से मारा गया था और वहां खून ही खून बिखरा हुआ था। पुलिस को इस कहानी पर शक हुआ और जब सख्ती से पूछताछ की गई तो सूरज ने सच उगल दिया।

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