आतंक की लड़ाई किसी पंथ के विरुद्ध नहीं : नरेंद्र मोदी

March 1, 2018 3:22 pm0 commentsViews: 64

विज्ञान भवन में आयोजित इस्लामिक हेरिटेज कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विविधता भरी संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को किसी पंथ के खिलाफ लड़ाई नहीं समझा जाना चाहिए, ऐसी मानसिकता सही नहीं है। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत की संस्कृति ही बहुआयामी है, जिसमें विश्व केसभी धर्म फले-फूले हैं। उन्होंने कहा कि ‘यहाँ से भारत के प्राचीन दर्शन और सूफियों के प्रेम और मानवतावाद की मिलीजुली परम्परा ने मानवमात्र की मूलभूत एकता का पैगाम दिया है।मानवमात्र के एकात्म की इस भावना ने भारत को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का दर्शन दिया है। भारत ने सारी दुनिया को एक परिवार मानकर उसके साथ अपनी पहचान बनाई है’।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बोल रहे थे तब जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह II भी वहां मौजूद थे। उन्होंने जॉर्डन किंग अब्दुल्लाह से कहा कि आपका देश और हमारा दोस्त देश ‘जॉर्डन’ एक ऐसी पवित्र भूमि पर है जहां से पैंगबरों और संतों के ज्ञान की रौशनी ने पूरी दुनिया में फैली है। नरेंद्र मोदी ने आगे कहा कि ‘आप स्वयं विद्वान हैं और भारत से अच्छी तरह वाकिफ हैं। आप अच्छी तरह से जानते हैं कि दुनिया के सभी धर्म भारत के पालने में पले-बढ़े हैं। दुनिया भर के मजहब और मत भारत की मिट्टी में पनपे हैं। यहां की आबो-हवा में जिंदगी पाई और सांस ली चाहे वह भगवान बुद्ध हों या पिछली शताब्दी में महात्मा गांधी हों।’

पीएम मोदी ने मुस्लिम समुदाय को विज्ञान और शिक्षा से जोड़ने की बात कही। नरेंद्र मोदी ने कहा कि वोह चाहते हैं कि मुस्लिम युवाओं के एक हाथ में कुरान हो और दूसरे हाथ में कंप्यूटर हो। वह चाहते हैं कि मुस्लिम युवा आधुनिकीकरण और ज्ञान-विज्ञान की दुनिया से जुड़ें और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करें। उन्होंने भारत की साझा गंगा-जमुनी संस्कृति की तारीफ करते हुए कहा कि ‘दर्शन और मजहब की बात तो छोड़ें भारत के जनमानस में सभी धर्मों के आदर की भावना भरी है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार यह दिल्ली इंद्रप्रस्थ है और सूफियाना कलाओं की सरजमीं भी। हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह यहीं हैं। दिल्ली गंगा जमुना की दोआब की दहलीज है। भारत की राजधानी हमारी मिली-जुली संस्कृति का प्रवेश द्वार है। अभी भारत में होली का रंग भरा त्योहार मनाया जा रहा है। कुछ दिन पहले बौद्ध नववर्ष और इस माह के अंत में गुड फ्राइडे और फिर बौद्ध जयंती सारा देश मनाएगा। फिर रमजान का पवित्र माह है और जिसके अंत में ईद-उल-फितुर मनाया जाएगा।’


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘हमारी विरासत और मूल्य, हमारे मज़हबों का पैगाम और उनके उसूल वह ताक़त हैं जिनके बल पर हम हिंसा और दहशतगर्दी जैसी चुनौतियों से पार पा सकते हैं, इंसानियात के ख़िलाफ़ दरिंदगी का हमला करने वाले शायद यह नहीं समझते कि नुकसान उस मज़हब का होता है जिसके लिए खड़े होने का वो दावा करते हैं’।